गंगा दशहरा का महत्व और कहानी

ग़ंगा दशहरा का महत्व और कहानी

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चित्र साभार : गूगल

गंगा नदी को पवित्र और दिव्य नदी माना जाता है, हिंदू धर्म में इसे सिर्फ एक नदी ही नहीं, अपितु इस नदी को एक मॉ का स्थान दिया गया है। पुराणों और वेदों मेंं गंगा नदी को मोक्षदायिनी कहा गया है। गंगा का भारतीयों के जीवन में पौराणिक, ऐतिहासिक,धार्मिक और आर्थिक रूप से बहुत महत्व है। गंगा का पानी बहुत पवित्र माना जाता है और सभी हिंदू अनुष्ठानों के लिए हर किसी द्वारा इसका उपयोग किया जाता है।

पौराणिक हिंदू मान्यताओं के अनुसार यह माना जाता है कि मा गंगा जेठ मास के शुक्ल पक्ष की दसवी तिथि को स्वर्ग से धरती पर अवतरित हुई थी। अंग्रेजी कैलंडर के अनुसार इस साल यह शुभ तिथि आज के दिन 24 मई 2018 को पड़ रही है। इस दिन को गंगा दशहरा के रूप में मनाया जाता है।

क्या है गंगा दशहरा पर्व का महत्व और क्यों मनाया जाता है यह पर्व?

माना जाता है कि इस दिन स्वर्ग से गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था।पुराणों में वर्णित है कि इसी दिन सुर्यवंशी राजा भगीरथ की बहुत कठिन तपस्या के बाद मॉ गंगा को नदी स्वरूप मे स्वर्ग से पृथ्वी लोक पर लाने का मानवकल्याण रुपी कार्य पूर्ण हुआ था।तभी से हर साल गंगादशहरा के पावन अवसर पर गंगा पूजा के साथ कई संस्कार,रीतियों और अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है। माना जाता है कि गंगा दशहरा के अवसर पर्व पर माँ गंगा में डुबकी लगाने से सभी पाप धुल जाते हैं और मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। वैसे तो गंगा स्नान का अपना अलग ही महत्व है, लेकिन इस दिन स्नान करने से मनुष्य सभी दुःखों से मुक्ति पा जाता है। गंगा दशहरा के दिन दान पुण्य का विशेष महत्व है।

गंगा के अवतरण की पौराणिक कहानी

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्राचीन समय में इक्ष्वाकु वंश में सगर नाम के राजा हुए। राजा सगर की दो रानिया थी- केशानी और सुमति। दोनों मे से किसी भी रानी से राजा की कोई संतान न थी। संतान प्राप्ति के लिये राजा सगर ने कई यज्ञ, अनुष्टठान किये। जिसके फलस्वरूप रानी केशानी से एक पुत्र प्राप्त हुआ-असमजस और दूसरी रानी सुमति ने साठ हज़ार पुत्रों को जन्म दिया। कुछ साल बाद राजा सगर ने अपने राज्य विस्तार के लिये अश्वमेध यज्ञ का आयोजन किया। प्रचलित यज्ञ विधान के अनुसार अश्व (घोडा) को पडोसी राज्यो की सीमाओंं की और खुला छोड दिया जाता था । यदि यज्ञ के अश्व को किसी अन्य राजा की सेना ने पकड लिया तो उसे युद्ध करना पड्ता था। और युद्ध में जो विजेता होता था उसका पराजित राज्य पर अधिकार हो जाता था। इस प्र्कार राजा सगर ने सभी राजाओं को बताने के लिये अश्व को मुक्त विचरण के लिये छोड दिया। यज्ञ की रक्षा का भार उनके साठ हज़ार पुत्रों ने संभाला। इंद्र देव नही चाह्ते थे कि यह यज्ञ सफल हो इस्लिये उन्होने सगर के यज्ञीय अश्व का अपहरण कर लिया। यह यज्ञ के लिए विघ्न था. परिणामतः सगर के साठ हजार पुत्रों ने अश्व को खोजना शुरू कर दिया। सारा भूमंडल खोज लिया पर अश्व नहीं मिला। फिर अश्व को पाताल लोक में खोजने के लिए पृथ्वी को खोदा गया। खुदाई पर उन्होंने देखा कि साक्षात्‌ ‘महर्षि कपिल’ वहा तपस्या कर रहे हैं. उन्हीं के पास महाराज सगर का अश्व घास चर रहा है. उन्हें देखकर वे ‘चोर-चोर’ चिल्लाने लगे और उनका ध्यान भंग कर दिया।

महर्षि कपिल की समाधि टूट गई. ज्यों ही महर्षि ने अपने आग्नेय नेत्र खोले, त्यों ही सभी 60,000 पुत्र महर्षि कपिल के श्राप से भस्म हो गये। सगर के वंसज श्रापित हुए अपनेे पुर्वजों की मुक्त्ति का बहुत प्रयास किया। परन्तु किसी से यह सम्भव नही हुआ। आगे जाकर राजा सगर के वंश मेंं राजा भगीरथ उत्पन्न हिए ।

भगीरथ ने मृत पूर्वजो का श्राद करके उनका उद्धार कंरने का निश्चय किया। परंतु इस कार्य के लिये प्रयाप्त जल उपलब्ध नही था क्युकि श्राप के प्रभाव से जल के श्रोत भी सुख चुके थे। राजा भगीरथ ने अपने मृत पूर्वजों के उद्धार के लिये तथा प्रजा को अकाल से मुक्ति दिलाने के सैकडो वर्षो तक कठोर तप किया। भगीरथ के तप से प्रसन्न होकर ब्रह्मा ने उनसे वर मांगने को कहा तो भगीरथ ने ‘गंगा’ के धरती पर अवतरण की इच्छा प्रकट की।

इस पर ब्रह्मा ने कहा- ‘राजन! तुम गंगा का पृथ्वी पर अवतरण तो चाहते हो? परंतु क्या तुमने पृथ्वी से पूछा है कि वह गंगा के भार तथा वेग को संभाल पाएगी? मेरा विचार है कि गंगा के वेग को संभालने की शक्ति केवल भगवान शंकर में है. इसलिए उचित यह होगा कि गंगा का भार एवं वेग संभालने के लिए भगवान शिव का अनुग्रह प्राप्त कर लिया जाए.’ महाराज भगीरथ ने वैसे ही किया

उनकी कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्माजी ने गंगा की धारा को अपने कमंडल से छोड़ा. तब भगवान शिव ने गंगा की धारा को अपनी जटाओं में समेटकर जटाएं बांध लीं. इसका परिणाम यह हुआ कि गंगा को जटाओं से बाहर निकलने का पथ नहीं मिल सका।

अब महाराज भगीरथ को और भी अधिक चिंता हुई. उन्होंने एक बार फिर भगवान शिव की आराधना में घोर तप शुरू किया. तब कहीं भगवान शिव ने गंगा की धारा को मुक्त करने का वरदान दिया. इस प्रकार शिवजी की जटाओं से छूट कर गंगाजी हिमालय की घाटियों में कल-कल निनाद करके मैदान की ओर मुड़ी. इस प्रकार . गगा की पवित्र धारा के प्रवाह में सभी भगीरथ के सभी पूर्वजों की राख बह गयी और उन्हे श्राप से मुक्ति मिल गयी। मा गंगा के अवतरित होने सेे धरती फिर सेे हरी- भरी और उपजाऊ हो गयी और प्रजा भी सुखी हो गयी।

भागीरथ के महान प्रयासों की सभी देवताओं और उनके पूर्वजों ने प्रशंसा की, और उनके इस कार्य को आज भी भगीरथ प्रयास (सभी बाधाओं के बावजूद कुछ महान कार्य करना ) के रूप में जाना जाता है।

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चींटी और कबूतर । हिंदी कहानी

चींटी और कबूतर की कहानी 

 गर्मी के दिन थे। एक चींटी  पानी की तलाश में थी। कुछ समय इधर- उधर घुमने के बाद, वह एक झरने के पास आयी।  झरने तक  पहुंचने के लिए, उसे घास की एक तेज पत्ती पर चढ़ना पड़ा। यह रास्ता बनाते समय, वह फिसल गई और पानी में गिर गई।

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अगर  पास के पेड़ पर बैठा  कबूतर यह सब नहीं देखता, तो वह डूब सकती थी।  चींटी को परेशानी में  देखकर , कबूतर ने जल्दी ही एक पत्ता तोड़्कर इसे मुश्किल में फंसी  चींटी के पास पानी में गिरा दिया। चींटी पत्ते  की तरफ चली गई और तुरंत उस पर चढ़ गई। जल्द ही, पत्ता बहकर सूखी जमीन पर पहुंच गया , और चींटी बाहर अ गयी। आखिर में वह सुरक्षित थी।

 ठीक उसी  समय, वहां एक शिकारी अपने जाल को कबूतर पर फेंकने वाला था, वह उसे पकड़ना चाह्ता था।

चीटी ने अनुमान लगाया कि वह शिकारी  क्या करने वाला है , चींटी ने तभी  उसे एड़ी पर काट दिया। जैसे ही शिकारी को दर्द मह्सूस हुआ, उसके हाथ से जाल गिर गया। और तभी झट से कबूतर वहा से उड गया।कबूतर ने चींटी के जान बचा कर जो नेक काम किया था। आज उसी ने उसकी जान बचायी।

 एक अच्छा किया गया काम दूसरे  अच्छे काम को प्रेरित करता है।

Note : This story is inspired from this post 

पतंग की डोर : परिवार दिवस पर एक कहानी

पतंग की डोर /Patang ki dor । A Hindi Story on International Family Day

हर साल 15 मई को अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस मनाया जाता है। 1993 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा यह दिवस घोषित किया गया था।  इस अवसर पर एक प्रेरणादायक कहानी आपके साथ शेयर कर  रही हू‌ं।

पतंग की डोर 

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एक बार एक गांव मेंं पतंग उड़ाने केे त्योहार  का आयोजन हुआ। गांव का एक आठ साल का बच्चा दीपू भी अपने पिता के साथ इस  त्योहार में गया। दीपू  रंगीन  पतंगों  से भरा आकाश देखकर बहुत खुश हो गया। उसने अपने पिता से उसे एक पतंग और एक मांझा ( धागे का रोल)  दिलाने  के लिए कहा ताकि वह भी  पतंग उड़ सके। दीपू के पिता दुकान में गए और उन्होनें  पतंग और धागे का एक रोल  खरीद्कर अपने बेटे  को दे दिया।

अब दीपू ने  पतंग उड़ाना शुरू कर दिया। जल्द ही, उसकी पतंग आकाश में ऊंचा उड़ने लगी । थोड़ी देर के बाद, उसने अपने पिता से कहा, “पिताजी, ऐसा लगता है कि धागा पतंग को उंचा उड़ने से रोक रहा है, अगर हम इसे तोड़ते हैं, तो  पतंग इससे भी और ज्यादा उंची उड़गी। क्या हम इसे तोड़ सकते हैं? “तो, पिता ने रोलर से धागा   काटकर अलग कर  दिया। पतंग थोड़ा ऊंचा जाना शुरू हो गयी ।  यह देखकर दीपू बहुत खुश हुआ।

लेकिन फिर, धीरे-धीरे पतंग ने नीचे आना शुरू कर दिया। और, जल्द ही  पतंग एक अज्ञात इमारत की छत पर गिर गयी । दीपू को यह देखकर आश्चर्य हुआ। उसने धागे को काटकर  पतंग को मुक्त कर दिया था ताकि वह ऊंची उड़ान भर सके, लेकिन इसके बजाय, यह गिर पड़ी। उसने अपने पिता से पूछा, “पिताजी, मैंने सोचा था कि धागे को काटने के बाद, पतंग खुलकर उंचा  उड़ सकती है । लेकिन यह क्यों गिर गयी ? “

पिता ने समझाया, “बेटा, जब हम जीवन की ऊंचाई पर रहते हैं, तब अक्सर सोचते हैं कि कुछ चीजें जिनके साथ हम बंधे हैं और वे हमें आगे बढ़ने से रोक रहे हैं। धागा पतंग को ऊंचा उड़ने से नहीं रोक रहा था, बल्कि  जब हवा धीमी  हो रही थी उस वक़्त धागा पतंग को  ऊंचा रहने में मदद कर रहा था, और जब हवा तेज  हो गयी तब तुमने धागे की मदद से ही पतंग को उचित दिशा में ऊपर जाने में मदद की। और जब हमने  धागे को काटकर छोड़ दिया , तो धागे के माध्यम से पतंग को जो सहारा मिल रहा था वह खत्म हो गया और पतंग टूट कर गिर गयी “। दीपू को बात समझ में आ गयी और उसे अपनी गलती का एह्सास हो गया।

कहानी की सीख :  कभी-कभी हम महसूस करते हैं कि यदि हम अपने परिवार, घर से बंधे नहीं हो तो  हम जल्दी से प्रगति कर सकते हैं और हमारे जीवन में नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकते हैं  लेकिन, हम यह महसूस नही करते कि  हमारा  परिवार, हमारे प्रियजन ही हमें  जीवन के  कठिन समय से उबरने  में मदद करते हैं और हमें अपने जीवन में    आगे बढने  के लिए प्रोत्साहित करते हैं। वे हमारे लिये रुकावट नही है, बल्कि  हमारा सहारा है।

 अर्चना त्रिपाठी

Arguments quotes in Hindi

तर्क और विवाद पर विचार/ Arguments quotes in Hindi

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Quote 1: It takes two to quarrel, but only one to end it.
In Hindi : झगडा करने कए लिये दो लोगों की जरुरत होती है, पर झगडा खत्म करने के लिये केवल एक की।

Quote 2: soft words win hard hearts.

In Hindi : नरम शब्द कठोर दिलों को जीत लेते है|

Quote 3: No great advance has ever been made in science, politics, or religion, without controversy.

In Hindi : विज्ञान, राजनीति या धर्म में कभी भी कोई महान प्रगति विवाद के बिना नहीं हुई है।

Quote 4: insults are the arguments employed by those who are in wrong.

In Hindi: अपमानित करना उन लोगों द्वारा सुनियोजित तर्क होते है जो कि गलत के पक्ष में होते है।

Quote 5: Silence is one of the hardest arguments to refute.

In Hindi: मौन रहना , खंडन करने के सबसे कठिन तर्कों में से एक है।

Quote 6: Behind every argument is someone’s ignorance

In Hindi : हर तर्क/विवाद के पीछे किसी की अज्ञानता होती है।

Quote 7: To argue with a man who has renounced the use of reason is like administering medicine to the dead.

In Hindi : किसी ऐसे व्यक्ति के साथ बहस करना, जिसने विवेक बुद्धि/तर्क बुद्धि का उपयोग करना छोड़ दिया है, मृत पर दवा का प्रयोग करने के समान है

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10 inspirational quotes in Hindi -महान व्यक्तियों के प्रेरणादायक विचार

Quote 8: anyone who conducts an argument by appealing to authority is not using his intelligence he is just using his memory.

In Hindi : कोई भी जो प्राधिकारी से अपील करके तर्क पेश करता है,वह अपनी बुद्धि का उपयोग नहीं कर रहा है, वह सिर्फ अपनी याददाश्त का उपयोग कर रहा है।
Quote 9: The best argument against democracy is a five-minute conversation with the average voter.
In Hindi: लोकतंत्र के विरुद्ध सबसे अच्छा तर्क है यह है कि- साधारण मतदाता से पांच मिनट की बातचीत।
Quote 10: He who establishes his argument by noise and command shows that his reason is weak.
In Hindi: वह जो शोर और आदेश से अपना तर्क स्थापित करता है, वह दिखाता है कि उसका तर्क और विचार कमजोर है।
Note: तर्क और विवाद पर विचार/ Arguments quotes in Hindi (English version) have been taken from different sources on internet. Despite taking utmost care there could be some mistakes in Hindi Translation of तर्क और विवाद पर विचार/ Arguments quotes in Hindi .

अर्चना त्रिपाठी

Dale Carnegie Inspiring Thoughts in Hindi

Dale Carnegie Quotes in Hindi

डेल कार्नेगी के अनमोल विचार

मैंने कुछ दिन पहले Dale Carnegie की किताब “How to win friends and influence people” का हिंदी अनुवाद ” लोक व्यवहार” पढा था। Dale Carnegie एक प्रसिद्दध motivational speaker थे। आज इस किताब की कुछ best inspiring quotes इस पोस्ट केे माध्यम से share कर रही हूं।

Quote 1: It isn’t what you have or who you are or where you are or what you are doing that makes you happy or unhappy. It is what you think about it.

In Hindi : वो बात जो आपको खुश या दुखी करती है ये नही है कि -आपके पास क्या है या आप कौन हैं या आप कहां हैं या आप क्या कर रहे हैं – वो ये है कि आपके इनके बारे मे कैसा सोचते है।

Dale Carnegie डेल कार्नेगी

Quote 2: Don’t be afraid of enemies who attack you. Be afraid of the friends who flatter you.
In Hindi :आप पर हमला करने वाले दुश्मनों से मत डरो। आपकी चापलूसी करने वाले दोस्तों से डरो।

Dale Carnegie डेल कार्नेगी

Quote 3: Any fool can criticize, complain, and condemn—and most fools do. But it takes character and self-control to be understanding and forgiving.

In Hindi : कोई भी मूर्ख आलोचना, शिकायत, और निंदा कर सकता है- और अधिकांश मूर्ख ऐसा ही करते हैं। लेकिन समझदार और क्षमाशील बनने के लिए चरित्र और आत्म-नियंत्रण की आवश्यकता होती है।

Dale Carnegie डेल कार्नेगी

Quote 4: When dealing with people, remember you are not dealing with creatures of logic, but with creatures bristling with prejudice and motivated by pride and vanity.

In Hindi : लोगों से व्यवहार/ करते समय ,यह याद रखें कि आप तर्क के प्राणियों के साथ व्यवहार नही कर रहे हैं, अपितु पूर्वाग्रह से तने हुए और गर्व और अभिमान से प्रेरित प्राणियों के साथ व्यवहार कर रहे हैं।

Dale Carnegie डेल कार्नेगी

Quote 5: Everybody in the world is seeking happiness—and there is one sure way to find it. That is by controlling your thoughts. Happiness doesn’t depend on outward conditions. It depends on inner conditions.”

In Hindi :दुनिया में हर कोई खुशी की तलाश में है- और इसे खोजने का एक निश्चित तरीका है। वह है – अपने विचारों को नियंत्रित करना। खुशी बाहरी स्थितियों पर निर्भर नहीं है। यह आंतरिक स्थितियों पर निर्भर करता है।

Dale Carnegie डेल कार्नेगी

Quote 6: Talk to someone about themselves and they’ll listen for hours.

In Hindi : किसी व्यक्ति से उसके बारे में बात करें और वे आपको घंटों तक सुनेंगे।

Dale Carnegie डेल कार्नेगी

Quote 7: Actions speak louder than words, and a smile says, ‘I like you. You make me happy. I am glad to see you.

In Hindi :कर्म शब्दों से अधिक तीव्रता से बोलते हैं, और एक मुस्कुराहट कहती है, ‘मैं तुम्हें पसंद करता हूं। तुम मुझे खुश करते हो। तुम्हें देख कर मैं प्रसन्न हूँ।

Dale Carnegie डेल कार्नेगी

Quote 8: A man convinced against his will, is of the same opinion still”

In Hindi : एक आदमी जिसे उसकी इच्छा के खिलाफ आश्वस्त किया गया है, अभी तक भी उसकी वही राय है।

Dale Carnegie डेल कार्नेगी

Quote 9: The difference between appreciation and flattery? That is simple. One is sincere and the other insincere. One comes from the heart out; the other from the teeth out. One is unselfish; the other selfish. One is universally admired; the other universally condemned

In Hindi : प्रशंसा और चापलूसी के बीच का अंतर क्या है ? यह आसान है। एक निष्ठापूर्ण है और दूसरा निष्ठाहीन है। एक दिल से बाहर आता है; दूसरा दांतों से। एक निःस्वार्थ है; दूसरा स्वार्थी । एक की सार्वभौमिक प्रशंसा की जाती है; और दुसरे की सार्वभौमिक निंदा।

Dale Carnegie डेल कार्नेगी

Quote 10: Names are the sweetest and most important sound in any language.”

In Hindi : नाम किसी भी भाषा में सबसे मधुर और सबसे अधिल महत्वपूर्ण ध्वनि है।

Dale Carnegie डेल कार्नेगी

Quote 11: To be interesting, be interested.

In Hindi: दिलचस्प इंसान बनने के लिये, दिलचस्पी लें (लोगों में)

Dale Carnegie डेल कार्नेगी

Quote 12: If You Want to Gather Honey, Don’t Kick Over the Beehive”

In Hindi : अगर आप शहद इकट्ठा करना चाहते हैं, तो मधुमक्खी के छ्त्ते पर लात मत मारो।

Dale Carnegie डेल कार्नेगी

Note: Despite taking utmost care there could be some mistakes in Hindi Translation of Dale Carnegie Quotes.

निवेदन: कृपया अपने comments के मध्यम से बताएं कि Dale Carnegie Quotes. का हिंदी अनुवाद आपको कैसा लगा.

सम्राट की चेतावनी: तेनालीरामा की चतुराई Tenali Rama story in Hindi

सम्राट की चेतावनी: तेनालीरामा की चतुराई

Tenali Rama story in Hindi

आप सब ने तेनालीरामा के बारे में तो अवश्य सुना होगा। वे 16वीं शताब्दी मे विजयनगर राज्य के सम्राट श्री कृष्णदेव राय के दरबार में अष्टदिग्गजों में से एक थे। उनकी कुशाग्र बुद्धि के बारे में अनेक कहनियां प्रचलित है। आज एक ऐसी ही कहानी इस प्रकार है:-

सम्राट की चेतावनी: तेनालीरामा की चतुराई

Tenali Rama story in Hindi

सम्राट कृष्णदेव राय के पास एक सुंदर हाथी था। उसका नाम धवलगिरि था| वह उसे बेहद प्यार करते थे। एक दिन धवलगिरि बीमार पड़ गया। सम्राट कृष्णदेव ने अपने कर्मचारियों को उसकी सावधानी से देखभाल करने का आदेश दिया और कहा कि जो व्यक्ति उन्हें धवलगिरि की मृत्यु की खबर देगा उसे फांसी पर चढ़ा दिया जाएगा।

कुछ दिनों बाद सच में धवलगिरि हाथी की मृत्यु हो गई । अब कर्मचारी घबराए कि सम्राट को यह दुखद सूचना कैसे दी जाए?

हारकर वे सब तेनालीराम के पास गये। तेनालीराम ने उनकी हिम्मत बढ़ाई और कहा कि वह स्वयं सम्राट को इस दुखद खबर देंगे। दरबार में जाकर पहले तो तेनालीराम ने औपचारिक बातें कही, फिर उसने चिंतित स्वर में कहा, “महाराज आपका प्रिय धवलगिरि न कुछ खाता है, ना पीता है, न उठता है. ना बैठता है, वह कुछ भी नहीं करता, यहां तक कि सांस भी नहीं लेता है। इतना सुनते ही सम्राट ने घबराकर पूछा,” क्या धवलगिरि की मृत्यु हो गयी है? “

तेनालीराम ने कहा, “ महाराज, यह आपने क्या कह दिया? आप अपनी चेतावनी स्वयं ही भूल गए !” सम्राट कुछ समझ ना पाए। सहसा उन्हें अपना कहा याद आ गया और उस दुख में भी वह मुस्कुरा उठे” उन्होंने कहा,” तेनालीरामा तुमने अपनी चतुराई से एक निर्दोष व्यक्ति की जान बचा ली, अन्यथा दुख के आवेग में मै धवलगिरि की मृत्यु की खबर लाने वाले को फांसी पर चढ़ा देता।“

कैसा लगा तेनालीरामा की चतुराई का किस्सा- सम्राट की चेतावनी: तेनालीरामा की चतुराई

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Benefits of having a family

benefits of family in Hindi/ परिवार का महत्व

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benefits of family in Hindi/ परिवार का महत्व

आज हम सब का जीवन बहुत बदल गया है। प्रौद्योगिकी का विकास, नये सांस्कृतिक मानदंडों, नई प्राथमिकताओं और इंटरनेट के द्वारा प्रसारित संचार के नये और तेज माध्यमों ने आज की पीढी के जीवन जीने के तरीके में बहुत से बद्लाव लाये है। एक तरफ इन बदलावों ने जीवन को बहुत सरल बना दिया है। एक सेकेड मे अपनी कोई भी बात, कोई भी तस्वीर, यहा तक कि कोई भी गिफ्ट दुनिया के किसी भी कोने मे पहुंचा सकते है। अपनी जरुरत की चीजे खरीद्ने के लिये बाजार जाने की जरुरत नही। आपके  एक क्लिक् पर सब सामान  आपके  घर पर हाज़िर हो जाता है।

वही दूसरा पहलू  यह भी है कि हम अपने अपनों से ही दूर हो गये है।  आज हम अपने पडोसी का नाम तक नही जांनते। इस बदलते माहौल मे आज संयुक्त परिवार की प्रथा खत्म होती जा रही है। भले ही परिवार का स्वरूप बदल गया हो, पर यह आज भी महत्वपूर्ण संस्था है। इस बद्ले माहौल में “परिवार” का क्या महत्व है” आइए जांनते है।

परिवार की परिभाषा:  परिवार सामाजिक संरचना की एक मूल इकाई है।  अंग्रेज़ी का “family” शब्द एक लैटिन शब्द है जिसका अर्थ है “जीवन भर के महत्वपूर्ण चरणों के दौरान एक साथ रहने वाले व्यक्तियों के समूह।“ यह  जैविक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक संबंधों से एक-दूसरे से बंधे व्यक्तियों के समूह को संदर्भित करता है।

परिवार का आकार अलग-अलग  संस्कृतियों, समाज, देशों, और जातियो मे अलग हो सकता है। पारम्परिक संयुक्त भारतीय परिवार मे दो या दो से अधिक पीढीयो के लोग एक साथ एक छत के नींचे रह्ते थे, एक ही रसोई साझा करते थे । इसमेंदादा-दादी, मा-पिता, बच्चे, और भाईयों के साथ  मिलकर रहते थे। परन्तु अब ऐसे परिवार कम होते जा रहे है।  शहरीकरण और आधुनिकीकरण के कारण युवा पीढी पारंपरिक संयुक्त परिवार से दूर हो गयी है। संयुक्त परिवार की जगह एकल परिवार ने ले ली है, जिसमे पति –पत्नि और उंनके बच्चे रहते है।

स्वस्थ जीवन मे परिवार के लाभ :

जैसे-जैसे आधुनिक जीवन मे तनाव बढ्ता जा रहा है, एक परिवार में रहने का लाभ पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। बाहरी चुनौतियों का सामना करना आसान हो जाता है जब हमारे पास एक परिवार होता है और, हमें  उनका सामना नहीं करना पड़ता है। आजकल देखा जाता है ,कि अकेले रहने वाले लोग अवसाद का शिकार हो जाते है।

खुशी और गम बाटने के लिये

क्या कभी ऐसा हुआ है कि आपके पास  कोई अच्छी खबर है, लेकिन खबर बताने के लिए कोई भी नहीं? यहीं एक  परिवार की कमी खलती है । परिवार में हम अपने सुख दुख बता सकते है।  आजकल पारमपरिक त्योहार लोग भूलते जा रहे है।लोगो के पास समय नही है कि आने वाली पीढी को अपने संस्कृति, त्योहारो के बारे मे बता सके। ऐसे मे परिवार ही वह संस्था है जहां पर सब लोग मिलकर एक साथ हर त्योहार मनासकते है। इसमे अधिक संतुष्टि और ख़ुशी मिलती है। आपस मे एक दूसरे का सहयोग करने की भावना उत्त्पन्न होती है।

वित्तीय सुरक्षा

एक परिवार घर में रहने वाले हर किसी के लिए वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है। परिवार के कमाने वाले  सदस्य अपनी कमाई का एक हिस्सा का उपयोग परिवार में हर किसी की जरूरतों को पूरा करने में मदद करते हैं। दूसरा, परिवार में सभी घरेलु खर्चो के लिये,सब योगदान देते है। सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि परिवार मे  रहकर बच्चे यह सीखते है कि पैसे का प्रबंधन कैसे किया जाये और यह सीख  उंनके आगे के जीवन में बहुत काम आती है

बच्चे परिवार में नैतिक और धार्मिक मूल्य सीखते हैं

नैतिक और धार्मिक मूल्य सीखना परिवार का पारंपरिक कार्य रहा है। परिवार के माध्यम से बच्चे उस परिवार में चले आ रहे नैतिक और आध्यात्मिक विचारों से परिचित होते है जो कि उनके व्यक्तित्व विकास में बहुत सहायक होता है। परिवार एक तरह से पहला स्कूल है। परिवार के बडे सदस्य उन्हें प्यार, सम्मान, दोस्ती, ईमानदारी, दयालुता, साहस, समानता, अखंडता और जिम्मेदारी के मूल्य सिखाते हैं।

दोस्तों, जीवन मे हर व्यक्ति कभी न कभी बुरे और कठिन दौर से गुजरता है। हर कोई इंसान जाने-अंजाने गलती करता है, यह भूल कभी बडी भी हो सकती है, समाज के लिये भी गलत हो सकती है। जब आपको सबसे ज्यादा समर्थन की आवश्यकता होती है तो अन्य लोग आप से मूंह मोड़ सकते है\ ऐसे समय पर आपका परिवार ही आपका सहारा है। वे हमेशा आपके साथ है, भले ही वे आपकी गलती के लिये आपको सज़ा दे, लेकिन फिर सही रास्ते पर जाने की हिम्मत भी परिवार से ही मिलती है।

आपको यह लेख benefits of having a family कैसा लगा कृप्या comments में बताये .

अर्चना त्रिपाठी

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