सम्राट की चेतावनी: तेनालीरामा की चतुराई Tenali Rama story in Hindi

सम्राट की चेतावनी: तेनालीरामा की चतुराई

Tenali Rama story in Hindi

आप सब ने तेनालीरामा के बारे में तो अवश्य सुना होगा। वे 16वीं शताब्दी मे विजयनगर राज्य के सम्राट श्री कृष्णदेव राय के दरबार में अष्टदिग्गजों में से एक थे। उनकी कुशाग्र बुद्धि के बारे में अनेक कहनियां प्रचलित है। आज एक ऐसी ही कहानी इस प्रकार है:-

सम्राट की चेतावनी: तेनालीरामा की चतुराई

Tenali Rama story in Hindi

सम्राट कृष्णदेव राय के पास एक सुंदर हाथी था। उसका नाम धवलगिरि था| वह उसे बेहद प्यार करते थे। एक दिन धवलगिरि बीमार पड़ गया। सम्राट कृष्णदेव ने अपने कर्मचारियों को उसकी सावधानी से देखभाल करने का आदेश दिया और कहा कि जो व्यक्ति उन्हें धवलगिरि की मृत्यु की खबर देगा उसे फांसी पर चढ़ा दिया जाएगा।

कुछ दिनों बाद सच में धवलगिरि हाथी की मृत्यु हो गई । अब कर्मचारी घबराए कि सम्राट को यह दुखद सूचना कैसे दी जाए?

हारकर वे सब तेनालीराम के पास गये। तेनालीराम ने उनकी हिम्मत बढ़ाई और कहा कि वह स्वयं सम्राट को इस दुखद खबर देंगे। दरबार में जाकर पहले तो तेनालीराम ने औपचारिक बातें कही, फिर उसने चिंतित स्वर में कहा, “महाराज आपका प्रिय धवलगिरि न कुछ खाता है, ना पीता है, न उठता है. ना बैठता है, वह कुछ भी नहीं करता, यहां तक कि सांस भी नहीं लेता है। इतना सुनते ही सम्राट ने घबराकर पूछा,” क्या धवलगिरि की मृत्यु हो गयी है? “

तेनालीराम ने कहा, “ महाराज, यह आपने क्या कह दिया? आप अपनी चेतावनी स्वयं ही भूल गए !” सम्राट कुछ समझ ना पाए। सहसा उन्हें अपना कहा याद आ गया और उस दुख में भी वह मुस्कुरा उठे” उन्होंने कहा,” तेनालीरामा तुमने अपनी चतुराई से एक निर्दोष व्यक्ति की जान बचा ली, अन्यथा दुख के आवेग में मै धवलगिरि की मृत्यु की खबर लाने वाले को फांसी पर चढ़ा देता।“

कैसा लगा तेनालीरामा की चतुराई का किस्सा- सम्राट की चेतावनी: तेनालीरामा की चतुराई

Tenali Rama story in Hindi

बैल की समझ

बैल की समझ 

एक  दिन एक किसान का बैल कुएं में गिर गया। वह बैल घंटों जोर जोर से रोता रहा।  और किसान सुनता रहा और विचार करता रहा कि उसे क्या करना चाहिए और क्या नहीं। अंत में  उसने निर्णय लिया की चूकिंं  बैल काफी बूढ़ा हो चुका था अतः उसे बचाने से कोई लाभ नहीं इसलिए उसने उसे कुएं में ही दफना देना चाहिये।

किसान ने अपने सभी पड़ोसियों को मदद के लिए बुलाया। सभी ने एक-एक फावड़ा पकड़ा और कुएं में मिट्टी डालने शुरु कर दी जैसी ही बैल को समझ में आ गया कि यह सब क्या हो रहा है वह जोर जोर से रोने लगा। फिर अचानक से आश्चर्यजनक रूप से शांत हो गया… सब लोग चुपचाप हुए मिट्टी डाल रहे थे तभी किसान ने कुएं में झांका तो बैल  की  हरकत देखकर आश्चर्यचकित हो गया । अपनी पीठ पर पड़ने वाले मिट्टी को वह बैल हिल-हिल कर  नीचे गिरा देता था और फिर एक कदम बढ़कर उस पर चढ़ जाता।  जैसे-जैसे किसान तथा उसके पड़ोसी मिट्टी गिराते वैसे-वैसे   वह हिल-हिल कर मिट्टी को गिरा देता फिर उस मिट्टी के ढेर पर चढकर एक-एक सीढी उपर आता जाता था। जल्दी ही वह बैल कुऐं के किनारे तक  पहुंच गया और फिर बाहर आ गया।

सीख : आप भी परिस्थिति को अपने अनुकूल बना सकते हैं।

Farm bill 2020

India is an agricultural country more than 70% of India’s population is directly or indirectly involved in agriculture-related work. Recently central government has passed three bills on agricultural reforms. These bills are:-

  1. The farmers’ produce Trade and commerce (promotion and facilitation) Bill 2020
  2. The farmers (empowerment and protection) Agreement of price Assurance and farm Service bill, 2020
  3. The essential commodities (Amendment) bill 2020

These bills entail following provisions:-

The farmers’ produce Trade and commerce (promotion and facilitation) Bill 2020

  • opens up agricultural sale and marketing outside the notified agricultural produce Market committee (APMC) or mandis for farmers
  • Remove barriers to interstate trade which means farmers can sell their products openly to anyone and anywhere. There will be no Agricultural Produce Market Committee (APMC) market fee or cess on transactions in such trade areas. APMCs will continue their functioning. Now APMCs have to compete with these alternate platforms and now farmers have a choice for selling their products.
  • Provides a framework electronic trading of agricultural produce. The Farm Bill 2020 does not annihilate current MSP based procurement of food grains. 

2 The farmers (empowerment and protection) Agreement of price Assurance and farm Service bill, 2020

  • Farming agreement: The Ordinance provides for a farming agreement between a farmer and a buyer prior to the production or rearing of any farm produce.
  • The minimum period of an agreement will be one crop season, or one production cycle of livestock.
  • The maximum period is five years, unless the production cycle is more than five years.
  • Pricing of farming produce: The price of farming produce should be mentioned in the agreement.  For prices subjected to variation, a guaranteed price for the produce and a clear reference for any additional amount above the guaranteed price must be specified in the agreement.
  • Further, the process of price determination must be mentioned in the agreement.
  • Dispute Settlement: A farming agreement must provide for a conciliation board as well as a conciliation process for settlement of disputes.  The Board should have a fair and balanced representation of parties to the agreement.
  • At first, all disputes must be referred to the board for resolution.  If the dispute remains unresolved by the Board after thirty days, parties may approach the Sub-divisional Magistrate for resolution.
  • Parties will have a right to appeal to an Appellate Authority (presided by collector or additional collector) against decisions of the Magistrate.  Both the Magistrate and Appellate Authority will be required to dispose of a dispute within thirty days from the receipt of application.
  • The Magistrate or the Appellate Authority may impose certain penalties on the party contravening the agreement.  However, no action can be taken against the agricultural land of farmer for recovery of any dues.

The essential commodities (Amendment) bill 2020

  • This bill is an amendment to the Essential Commodities Act, 1955 which empowers the central government to designate certain commodities (such as food items, fertilizers, and petroleum products) as essential commodities. 
  • many agro foods like pulses, onion, potatoes, oil seeds, cereals, and edible oils are removed from the essential commodities list by this The essential commodities (Amendment) bill 2020 Except under unusual circumstances, this newly passed agriculture bill does away with the imposition of stock limit.
  • Business and traders get rid of harassment.
  • With the improvement of storage facilities, the wastage rate is likely to get reduced.
  • This latest agriculture policy aims for a stable price which will eventually help in raising farm incomes.

 Benefits of Agriculture Bill:

The government has introduced these Farm Bills to transform the agriculture sector. This step has been taken by the govt to spice up the agriculture sector and double the farmer’s income by 2022. It is thought that freeing of agriculture sector will eventually help in better pricing. When farmers will sell their products to corporates and exporters directly it will induce the corporate sector to invest in the agri-ecosystem. This will also give farmers better access to modern technology and farmers will be benefited from it.

Why Farmers are protesting against Agriculture bill 2020 ?

END of MSP?

Farmers are apprehensive of getting MSP for their produce as New Farm Bill 2020 opens the way for farmers to sell their produce in open market and fix price by themselves on mutual understanding of corporate and farmer. Farmers also fears that large retailers and corporate could dominate agriculture sector with money power. Farmers doubt that APMCs may become unavailable and have to shut down in future if trade moves substantially to other alternate platforms. Farmers fear that mandis will become redundant like BSNL and MTNL in future days.

No Mechanism for price fixation

The Price Assurance Bill doesn’t prescribe any mechanism for price fixation. Thus there is a apprehension in farmers that free hand given to private corporate houses could lead to farmer’s exploitation. The Essential Commodities (Amendment) Ordinance removes pulses, oil seeds, edible oils, onion and potatoes from the essential commodities list. Thus the amendment deregulates the production, movement, storage and distribution of these food commodities.

पतंग की डोर : परिवार दिवस पर एक कहानी

पतंग की डोर /Patang ki dor । A Hindi Story on International Family Day

हर साल 15 मई को अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस मनाया जाता है। 1993 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा यह दिवस घोषित किया गया था।  इस अवसर पर एक प्रेरणादायक कहानी आपके साथ शेयर कर  रही हू‌ं।

पतंग की डोर 

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एक बार एक गांव मेंं पतंग उड़ाने केे त्योहार  का आयोजन हुआ। गांव का एक आठ साल का बच्चा दीपू भी अपने पिता के साथ इस  त्योहार में गया। दीपू  रंगीन  पतंगों  से भरा आकाश देखकर बहुत खुश हो गया। उसने अपने पिता से उसे एक पतंग और एक मांझा ( धागे का रोल)  दिलाने  के लिए कहा ताकि वह भी  पतंग उड़ सके। दीपू के पिता दुकान में गए और उन्होनें  पतंग और धागे का एक रोल  खरीद्कर अपने बेटे  को दे दिया।

अब दीपू ने  पतंग उड़ाना शुरू कर दिया। जल्द ही, उसकी पतंग आकाश में ऊंचा उड़ने लगी । थोड़ी देर के बाद, उसने अपने पिता से कहा, “पिताजी, ऐसा लगता है कि धागा पतंग को उंचा उड़ने से रोक रहा है, अगर हम इसे तोड़ते हैं, तो  पतंग इससे भी और ज्यादा उंची उड़गी। क्या हम इसे तोड़ सकते हैं? “तो, पिता ने रोलर से धागा   काटकर अलग कर  दिया। पतंग थोड़ा ऊंचा जाना शुरू हो गयी ।  यह देखकर दीपू बहुत खुश हुआ।

लेकिन फिर, धीरे-धीरे पतंग ने नीचे आना शुरू कर दिया। और, जल्द ही  पतंग एक अज्ञात इमारत की छत पर गिर गयी । दीपू को यह देखकर आश्चर्य हुआ। उसने धागे को काटकर  पतंग को मुक्त कर दिया था ताकि वह ऊंची उड़ान भर सके, लेकिन इसके बजाय, यह गिर पड़ी। उसने अपने पिता से पूछा, “पिताजी, मैंने सोचा था कि धागे को काटने के बाद, पतंग खुलकर उंचा  उड़ सकती है । लेकिन यह क्यों गिर गयी ? “

पिता ने समझाया, “बेटा, जब हम जीवन की ऊंचाई पर रहते हैं, तब अक्सर सोचते हैं कि कुछ चीजें जिनके साथ हम बंधे हैं और वे हमें आगे बढ़ने से रोक रहे हैं। धागा पतंग को ऊंचा उड़ने से नहीं रोक रहा था, बल्कि  जब हवा धीमी  हो रही थी उस वक़्त धागा पतंग को  ऊंचा रहने में मदद कर रहा था, और जब हवा तेज  हो गयी तब तुमने धागे की मदद से ही पतंग को उचित दिशा में ऊपर जाने में मदद की। और जब हमने  धागे को काटकर छोड़ दिया , तो धागे के माध्यम से पतंग को जो सहारा मिल रहा था वह खत्म हो गया और पतंग टूट कर गिर गयी “। दीपू को बात समझ में आ गयी और उसे अपनी गलती का एह्सास हो गया।

कहानी की सीख :  कभी-कभी हम महसूस करते हैं कि यदि हम अपने परिवार, घर से बंधे नहीं हो तो  हम जल्दी से प्रगति कर सकते हैं और हमारे जीवन में नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकते हैं  लेकिन, हम यह महसूस नही करते कि  हमारा  परिवार, हमारे प्रियजन ही हमें  जीवन के  कठिन समय से उबरने  में मदद करते हैं और हमें अपने जीवन में    आगे बढने  के लिए प्रोत्साहित करते हैं। वे हमारे लिये रुकावट नही है, बल्कि  हमारा सहारा है।

 अर्चना त्रिपाठी

चींटी और कबूतर । हिंदी कहानी

चींटी और कबूतर की कहानी 

 गर्मी के दिन थे। एक चींटी  पानी की तलाश में थी। कुछ समय इधर- उधर घुमने के बाद, वह एक झरने के पास आयी।  झरने तक  पहुंचने के लिए, उसे घास की एक तेज पत्ती पर चढ़ना पड़ा। यह रास्ता बनाते समय, वह फिसल गई और पानी में गिर गई।

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अगर  पास के पेड़ पर बैठा  कबूतर यह सब नहीं देखता, तो वह डूब सकती थी।  चींटी को परेशानी में  देखकर , कबूतर ने जल्दी ही एक पत्ता तोड़्कर इसे मुश्किल में फंसी  चींटी के पास पानी में गिरा दिया। चींटी पत्ते  की तरफ चली गई और तुरंत उस पर चढ़ गई। जल्द ही, पत्ता बहकर सूखी जमीन पर पहुंच गया , और चींटी बाहर अ गयी। आखिर में वह सुरक्षित थी।

 ठीक उसी  समय, वहां एक शिकारी अपने जाल को कबूतर पर फेंकने वाला था, वह उसे पकड़ना चाह्ता था।

चीटी ने अनुमान लगाया कि वह शिकारी  क्या करने वाला है , चींटी ने तभी  उसे एड़ी पर काट दिया। जैसे ही शिकारी को दर्द मह्सूस हुआ, उसके हाथ से जाल गिर गया। और तभी झट से कबूतर वहा से उड गया।कबूतर ने चींटी के जान बचा कर जो नेक काम किया था। आज उसी ने उसकी जान बचायी।

 एक अच्छा किया गया काम दूसरे  अच्छे काम को प्रेरित करता है।

Note : This story is inspired from this post 

SHORT ESSAY ON CYBER SECURITY

साइबर सुरक्षा /CYBER SECURITY

साइबर सुरक्षा का अर्थ है डेटा, नेटवर्क, कार्यक्रमों और अन्य सूचनाओं को अनधिकृत या अप्राप्य पहुंच, विनाश या परिवर्तन से बचाना। आज की दुनिया में, कुछ सुरक्षा खतरों और साइबर हमलों के कारण साइबर सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण है। डेटा सुरक्षा के लिए, कई कंपनियां सॉफ़्टवेयर विकसित करती हैं। यह सॉफ्टवेयर डेटा की सुरक्षा करता है। साइबर सुरक्षा महत्वपूर्ण है क्योंकि यह न केवल जानकारी को सुरक्षित करने में मदद करती है बल्कि हमारे सिस्टम को वायरस के हमले से भी बचाती है। U.S.A और चीन के बाद, भारत में सबसे अधिक इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं।

साइबर अपराध क्या है?

किसी व्यक्ति या संगठित समूह द्वारा अपराध करने के लिए साइबरस्पेस, यानी कंप्यूटर, इंटरनेट, सेल फोन, अन्य तकनीकी उपकरणों आदि का उपयोग साइबर-अपराध कहा जाता है। साइबर हमलावर साइबर अपराध करने के लिए साइबरस्पेस में कई सॉफ्टवेयर और कोड का उपयोग करते हैं। वे मैलवेयर के उपयोग के माध्यम से सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर डिजाइन में कमजोरियों का फायदा उठाते हैं। हैकिंग, संरक्षित कंप्यूटर सिस्टम की सुरक्षा को भेदने और उनके कामकाज में हस्तक्षेप करने का एक सामान्य तरीका है।

मैलवेयर का उपयोग कंप्यूटर ऑपरेशन को बाधित करने, संवेदनशील जानकारी इकट्ठा करने या निजी कंप्यूटर सिस्टम तक पहुंच प्राप्त करने के लिए किया जाता है। यह आमतौर पर कोड, स्क्रिप्ट, सक्रिय सामग्री और अन्य सॉफ़्टवेयर के रूप में दिखाई देता है। ‘मैलवेयर’ शत्रुतापूर्ण या घुसपैठ सॉफ्टवेयर के विभिन्न रूपों को संदर्भित करता है, उदाहरण के लिए, ट्रोजन हॉर्स, रूटकिट्स, वर्म्स, एडवेयर इत्यादि।

आज उच्च इंटरनेट पैठ के कारण, साइबर सुरक्षा दुनिया की सबसे बड़ी जरूरत है क्योंकि साइबर सुरक्षा खतरे देश की सुरक्षा के लिए बहुत खतरनाक हैं। न केवल सरकार बल्कि नागरिकों को भी अपने सिस्टम और नेटवर्क सुरक्षा सेटिंग्स को अपडेट करने और उचित एंटी-वायरस का उपयोग करने के लिए लोगों में जागरूकता फैलानी चाहिए ताकि आपके सिस्टम और नेटवर्क सुरक्षा सेटिंग्स वायरस और मैलवेयर-मुक्त रहें।

Gaganyaan :- Human Space Mission by ISRO

Gaganyaan is a mission by the Indian Space Research Organisation (ISRO) to send a three-member crew to space for a period of five to seven days by 2022.

The space mission was first announced by Prime Minister Narendra Modi in 2018 in his Independence Day address to the nation. Ahead of the manned mission, ISRO plans to send two unmanned missions to space as part of the Gaganyaan mission. The first unmanned mission was scheduled to be sent in December 2020 and the second mission was scheduled for June 2021. However, the first unmanned mission has been delayed because of the disruption in ISRO’s work and operations on account of the coronavirus pandemic. The Gaganyaan spacecraft will be placed in a low earth orbit (LEO) of 300-400 kilometres. The total programme cost is expected to be under Rs.10000 crore.

Gaganyaan is significant because it is the first indigenous mission that will send Indian astronauts to space. If it succeeds, India will be the fourth country to have sent a human to space, the other three being the US, Russia and China. ISRO is developing the spacecraft and Russia is helping in the training of the astronauts.

Objectives of the Mission:

Improving international collaboration

Enhancement of science and technology levels in the country

A national project involving several institutes, academia and industry

Improvement of industrial growth

Inspiring youth

Development of technology for social benefit

Relevance of a Manned Space Mission for India:

Boost to industries: The Indian industry will find large opportunities through participation in the highly demanding Space missions. Gaganyaan Mission is expected will source nearly 60% of its equipment from the Indian private sector.

Employment: According to the ISRO chief, the Gaganyaan mission would create 15,000 new employment opportunities, 13,000 of them in private industry and the space organisation would need an additional manpower of 900.

Technological development: Human Space flights are frontier field in the science and technology. The challenges the Human Space Flights provide to India, and the benefits accruing from taking up those missions will be very high and will lead to further thrust for technological developments in India.

Spurs research and development: It will boost good research and technology development. With a large number of researchers with proper equipment involved, HSF will thrust significant research in areas such as materials processing, astro-biology, resources mining, planetary chemistry, planetary orbital calculus and many other areas

Motivation: Human space flight will provide that inspiration to the youth and also the national public mainstream. It would inspire young generation into notable achievements and enable them to play their legitimate role in challenging future activities

Prestige: India will be the fourth country to launch human space mission. The Gaganyaan will not only bring about prestige to the nation but also establish India’s role as a key player in the space industry.

Conclusion:-The success of Gaganyaan can lead to many more experiments with spaceflight missions. It will also give a filip to India’s dream of setting up its own space station. 

Farm bill 2020

India is an agricultural country more than 70% of India’s population is directly or indirectly involved in agriculture-related work. Recently central government has passed three bills on agricultural reforms. These bills are:-

  1. The farmers’ produce Trade and commerce (promotion and facilitation) Bill 2020
  2. The farmers (empowerment and protection) Agreement of price Assurance and farm Service bill, 2020
  3. The essential commodities (Amendment) bill 2020

These bills entail following provisions:-

The farmers’ produce Trade and commerce (promotion and facilitation) Bill 2020

  • opens up agricultural sale and marketing outside the notified agricultural produce Market committee (APMC) or mandis for farmers
  • Remove barriers to interstate trade which means farmers can sell their products openly to anyone and anywhere. There will be no Agricultural Produce Market Committee (APMC) market fee or cess on transactions in such trade areas. APMCs will continue their functioning. Now APMCs have to compete with these alternate platforms and now farmers have a choice for selling their products.
  • Provides a framework electronic trading of agricultural produce. The Farm Bill 2020 does not annihilate current MSP based procurement of food grains. 

2 The farmers (empowerment and protection) Agreement of price Assurance and farm Service bill, 2020

  • Farming agreement: The Ordinance provides for a farming agreement between a farmer and a buyer prior to the production or rearing of any farm produce.
  • The minimum period of an agreement will be one crop season, or one production cycle of livestock.
  • The maximum period is five years, unless the production cycle is more than five years.
  • Pricing of farming produce: The price of farming produce should be mentioned in the agreement.  For prices subjected to variation, a guaranteed price for the produce and a clear reference for any additional amount above the guaranteed price must be specified in the agreement.
  • Further, the process of price determination must be mentioned in the agreement.
  • Dispute Settlement: A farming agreement must provide for a conciliation board as well as a conciliation process for settlement of disputes.  The Board should have a fair and balanced representation of parties to the agreement.
  • At first, all disputes must be referred to the board for resolution.  If the dispute remains unresolved by the Board after thirty days, parties may approach the Sub-divisional Magistrate for resolution.
  • Parties will have a right to appeal to an Appellate Authority (presided by collector or additional collector) against decisions of the Magistrate.  Both the Magistrate and Appellate Authority will be required to dispose of a dispute within thirty days from the receipt of application.
  • The Magistrate or the Appellate Authority may impose certain penalties on the party contravening the agreement.  However, no action can be taken against the agricultural land of farmer for recovery of any dues.

The essential commodities (Amendment) bill 2020

  • This bill is an amendment to the Essential Commodities Act, 1955 which empowers the central government to designate certain commodities (such as food items, fertilizers, and petroleum products) as essential commodities. 
  • many agro foods like pulses, onion, potatoes, oil seeds, cereals, and edible oils are removed from the essential commodities list by this The essential commodities (Amendment) bill 2020 Except under unusual circumstances, this newly passed agriculture bill does away with the imposition of stock limit.
  • Business and traders get rid of harassment.
  • With the improvement of storage facilities, the wastage rate is likely to get reduced.
  • This latest agriculture policy aims for a stable price which will eventually help in raising farm incomes.

 Benefits of Agriculture Bill:

The government has introduced these Farm Bills to transform the agriculture sector. This step has been taken by the govt to spice up the agriculture sector and double the farmer’s income by 2022. It is thought that freeing of agriculture sector will eventually help in better pricing. When farmers will sell their products to corporates and exporters directly it will induce the corporate sector to invest in the agri-ecosystem. This will also give farmers better access to modern technology and farmers will be benefited from it.

Why Farmers are protesting against Agriculture bill 2020 ?

END of MSP?

Farmers are apprehensive of getting MSP for their produce as New Farm Bill 2020 opens the way for farmers to sell their produce in open market and fix price by themselves on mutual understanding of corporate and farmer. Farmers also fears that large retailers and corporate could dominate agriculture sector with money power. Farmers doubt that APMCs may become unavailable and have to shut down in future if trade moves substantially to other alternate platforms. Farmers fear that mandis will become redundant like BSNL and MTNL in future days.

No Mechanism for price fixation

The Price Assurance Bill doesn’t prescribe any mechanism for price fixation. Thus there is a apprehension in farmers that free hand given to private corporate houses could lead to farmer’s exploitation. The Essential Commodities (Amendment) Ordinance removes pulses, oil seeds, edible oils, onion and potatoes from the essential commodities list. Thus the amendment deregulates the production, movement, storage and distribution of these food commodities.

Essay on White Revolution (Operation flood) in Hindi

सफेद क्रांति पर निबंध/ Essay of white revolution( operation flood)

दूध के बारे में जागरूकता बढ़ाने और वैश्विक भोजन के रूप में इसके महत्व को बढ़ाने के उद्देश्य से 1 जून को दुनिया भर में विश्व दूध दिवस- world milk day  मनाया जाता है।  क्या आप जानते है कि आज 150 मिलियन टन उत्पादन के साथ भारत दुनिया में दूध का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। जबकि आजादी के समय भारत एक दूध आयात करने वाला देश था। फिर दूध की कमी वाले देश से हम दुनिया के सबसे बड़े दूध उत्पादक देश कैसे बन गये? यह सम्भव हुआ 70 के दशक में आरम्भ हुई – सफेद क्रांति के कारण, जिसे operation flood भी कहा जाता है।

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image source : http://www.topperlearning.com

सफेद क्रांति क्या है’?

सफेद क्रांति जिसे Operation Flood के नाम से भी जाना जाता है, दुनिया के सबस बडे‌ ग्रामीण विकास के कार्यक्र्मों मे से एक है। ऑपरेशन फ्लड भारत के राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) द्वारा शुरू किया गया एक ग्रामीण विकास कार्यक्रम था। यह कार्यक्रम 1 970 में लॉन्च किया गया था, जिसका मुख्य लक्ष्य डेयरी उत्पादन में भारत को आत्मनिर्भर बनाना था। यह दुनिया का सबसे बड़ा डेयरी विकास कार्यक्रम था। लगभग बीस साल (1975-1995)  साल तक चले इस सतत कार्यक्रम के  परिणामस्वरूप  भारत दूध की कमी वाले देश से दुनिया के सबसे बड़े दूध उत्पादक देशों में से एक बन गया। और इसलिए इसे भारत की white revolution भी कहा जाता है। operation  flood  के मुख्य लक्ष्य थे:

  1. दूध उत्पादन  की वृद्धि (“दूध की बाढ़”)
  2.  ग्रामीण आय को बढाना
  3. उपभोक्ताओं के लिए उचित कीमतें

“ऑपरेशन फ्लड को ग्रामीण विकास विजन की पुष्टि करने वाले बीस साल के प्रयोग के रूप में देखा जा सकता है”

–विश्व बैंक रिपोर्ट 1997 सी।

सफेद क्रांति के जनक : श्री वर्गीस कुरियन (26 नवंबर 1 9 21 – 9 सितंबर 2012), को भारत में ‘व्हाइट क्रांति का पिता’ कहा जाता है।  ग़ुजरात के आणंद मेंं स्थानीय किसानों को जब दूध का उचित मुल्य नही मिल पा रहा था, तब  सरदार बल्लभ भाई पटेल के पहल पर गुजरात के कैरा और आणद के किसानों के समूह से 1949 में अमूल नामक को- ओपरेटिव की स्थापना की गयी।  आज यही अमूल आज न सिर्फ भारत में बल्कि दुनिया में एक जाना पह्चाना ब्राड बन चुका है। वर्गीस कुरियन ने  उन्होंने अमूल के अध्यक्ष और संस्थापक के रूप में विपणन, खरीद और दूध और दूध उत्पादों की प्रसंस्करण  प्रक्रिया  को  नियंत्रित किया। जिसके  परिणामस्वरूप उपभोक्ताओं द्वारा भुगतान की गई कीमत का 70-80% डेयरी किसानों को नकद के रूप में जाने लगा। जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति में बहुत सुधार आया।

कुरियन ने अपने दोस्त एच एम दलाया के सहयोग से भैंस के दूध से दूध पाउडर और संघनित दूध( skimmed milk)  बनाने की प्रक्रिया का आविष्कार किया। कई कंपनियों को उनके नेतृत्व में शुरू किया गया था। पूर्व प्रधान मंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने अमूल के प्रबंधन, संसाधन और आधारभूत संरचना व्यवस्था के आधार पर उन्हें राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया। उनके नेतृत्व मे ही ऑपरेशन फ्लड कार्यक्रम की पहल की जो कि  अमूल के प्रयोगात्मक पैटर्न पर आधारित था।ऑपरेशन फ्लड का मूल आधार गांवों के दूध उत्पादक किसानों की सहकारी समितिया रही है, जिनके माध्यम से दूध खरीदा, बेचा जाता और marketing की सेवाये प्रदान की जाती है ये समितिया ( co-operatives) किसानों को आधुनिक प्रबंधन और प्रौद्योगिकी के बारे में सेवाये उपलब्ध  कराती है।

भारत में व्हाइट क्रांति के चरण क्या थे?

कार्यक्रम कार्यान्वयन

ऑपरेशन फ्लड तीन चरणों में लागू किया गया था।

चरण I : चरण I (1 970-19 80) को विश्व खाद्य कार्यक्रम के माध्यम से वित्त पोषित किया गया था| स्किम्ड दूध पाउडर और मक्खन तेल की बिक्री द्वारा । अपने पहले चरण के दौरान, ऑपरेशन फ्लड ने भारत के चार प्रमुख महानगरीय शहरों: दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में उपभोक्ताओं के साथ भारत के प्रमुख मिल्कशेडों में से 18 को जोड़ा।

चरण  II :–   1981 से 1985 तक दूसरा चरण चला। इस अवधि में मिल्क्शेदों की संख्या 18 से बढ्कर 136 हो गयी। 290 शहरी बाज़ारों में दूध के आउट्लेट का विस्तार हो चुका था। 1985 के अंत तक  43000 ग्रामीण को आपरेटिव की एक आत्म निर्भर नेटवर्क तैयार हो गया जिससे   चालीस लाख से अधिक दूध उत्पाद्क किसानो जुडे हुए थे।

चरण III :-    (1 985-1996) ने डेयरी सहकारी समितियों को दूध की मात्रा में वृद्धि और बाजार की खरीद के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे को और मजबूत करने में सक्षम बनाया। सहकारी सदस्य किसानो को पशुओं की  प्राथमिक चिकित्सा, स्वास्थ्य देखभाल, पौश्टिक चारा, आदि  सेवाए प्रदान दी गयी तथा उन्हें इसके बारे में शिक्षित भी किया गया।ऑपरेशन फ्लड फेज III ने भारत के डेयरी सहकारी आंदोलन को समेकित किया, 1 988-89 में मिल्कशेड 173 तक पहुंच गए और महिला सदस्यों और महिलाओं की डेयरी सहकारी समितियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।चरण III ने पशु स्वास्थ्य और पशु पोषण में अनुसंधान और विकास पर जोर दिया। नये अनुसंधान जैसे Theileriosis की वैक्सीन, bypass protein feed , सभी ने दुग्ध पशुओं की उत्पादकता बढाने में योगदान दिया।

इस समग्र और बहुआयामी रणनीति का ही परिणाम था कि न केवल बाजार की आपूर्ति अप्रभावित रही  बल्कि डेयरी किसानों को सही कीमतें मिलीं,  मुख्य सिद्धांत जिस पर ऑपरेशन – फ्लड ने  काम किया था, यह था कि संपूर्ण मूल्य श्रृंखला – खरीद से विपणन तक – छोटे, सीमांत और भूमिहीन किसानों को  केंद्र मे रखकर काम किया जाना  चाहिए।

इस प्रकार सफेद क्राति के कारण भारत न केवल दूध उत्पादन में दुनिया में पहले स्थान पर आ गया, अपितु यह एक ग्रामीण विकास का सफल कार्यक्रम सिद्ध हुआ। इसके माध्यम से किसानों को रोजगार बढ्ने के साथ -साथ उनकी आय भी बढी। उनके जीवन स्तर में सुधार हुआ।

 

 

 

Health is wealth/Hindi Story

मोटा राजा ।  स्वास्थ्य ही धन है : हिंदी कहानी

एक बार की बात है एक बहुत दयालु राजा था परंतु उसकी प्रजा उससे खुश नहीं थी क्योंकि राजा बहुत आलसी हो गया था । वह  सोने और खाने के अलावा कुछ करता ही नहीं था।

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राजा  कई दिन,कई हफ्ते, महीने तक बिस्तरों पर ही पड़ा रहता था। सिर्फ खाता था और सोता था।  राजा एक आलू की तरह हो गया। वह  का वजन जब बहुत ज्यादा बढ गया तो  उसके मंत्रियों ने उसके बारे में चिंता करनी शुरू कर दी। एक  दिन राजा को महसूस हुआ कि वह अपने शरीर को हिला भी नही पा रहा था वह बहुत मोटा हो चुका था और उसके दुश्मन राजा उसका मजाक उड़ाया करते थे ।

राजा ने राज्य के विभिन्न हिस्सों से बहुत ही निपुण वैध को बुलाया और कहा कि जो भी उसे ठीक कर देगा वह उस वैध को उचित इनाम देगा।  दुर्भाग्य से कोई भी राजा को ठीक नही कर सका। राजा ने अपना  सुडौल शरीर  वापस पाने के लिए बहुत सा धन खर्च किया । परंतु सब बेकार , कोई फायदा नही हुआ ।

एक दिन की बात है एक बुद्धिमान महात्मा ने उसके राज्य में भ्रमण किया। जब महात्मा ने  राजा की खराब  स्वास्थ्य के बारे में सुना तो तुरंत  मंत्री को सूचित किया कि वह राजा को जल्दी ही ठीक कर सकता है।  ये बात सुनकर  मंत्री बहुत खुश हुआ और उसने राजा को तुरंत इसकी सूचना दी। मत्री ने कहा,” महाराज, यदि आप अपनी इस समस्या से छुटकारा पाना चाहते हैं तो आप उस महात्मा से जरूर मिल लीजिए।”

वह  महात्मा महल से दूर के स्थान पर एक कुटिया में रहता था। क्योंकि राजा अपना शरीर हिला भी हीं सकता था वह ज्यादा दूर तक चल भी नहीं सकता था, इसलिये  उसने मंत्री को कहा कि वह उस बुद्धिमान महात्मा  को महल में ही ले आए।  परंतु महात्मा ने आने  से मना कर दिया और  कहा कि राजा अगर उपचार करवाना चाह्ते है तो उन्हें स्वयं  कुटिया तक  आना पड़ेगा ।

राजा ने सोचा अब जाना तो पडेगा। बहुत  मुश्किल से राजा महल से निकलकर उसके निवास स्थान तक पहुच ही गया।  महात्मा ने राजा का  धन्यवाद व्यक्त किया और कहा कि आप बहुत अच्छे राजा हैं और आप जल्दी ठीक हो जाएंगे। उसने राजा को उपचार के लिए दूसरे दिन भी आने के लिए कहा। परंतु एक शर्त रखी, ” महाराज ,आपका  उपचार तभी ठीक से  हो सकता है जब आप स्वयम अपने पैरों पर चलकर मेरी कुटिया पर  आयेंगे। ”

राजा का चलने में बहुत परेशानी होती थी फिर भी वह अपने कुछ मंत्रियों और  सेवकों की मदद से दूसरे दिन भी कुटिया तक पहुंच गया।  दुर्भाग्य से अगले दिन वह महात्मा कुटिया पर  उपलब्ध ही नहीं था। उसके शिष्य ने  बताया कि वह कहीं बाहर गए हैं और राजा से निवेदन किया कि अगले दिन भी वे चलकर उपचार के लिये आ जायें।

यह सिलसिला  दो हफ्तों तक चलता रहा। राजा महात्मा से कभी मिल ही नही पाता था। वह कुटिया तक जाता और फिर महल तक चलकर वापिस आ जाता। धीरे-धीरे, राजा को एहसास हुआ कि वह बहुत हल्का महसूस कर रहा है, वजन भी कुछ कम हो गया हैै। और वह पहले से अधिक सक्रिय महसूस कर रहा था। अब उसे यह बात समझ में आ गयी कि क्यों महात्मा ने ने उसे रोज चलकर कुटिया तक पहुंचने के लिए कहा था। अब उसने आलस त्याग दिया। रोज कसरत करना शुरू कर दिया।

इस तरह बहुत जल्द, राजा ने अपना  खोया हुआ स्वस्थ शरीर वापस कर लिया, और अब लोग भी अपने राजा से  बहुत खुश थे।

स्वास्थ्य ही धन है!

 

 

 

 

 

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