भूमि-सूक्तम/ पृथ्वी पर अनमोल विचार

भूमि-सूक्त – मॉ पृथ्वी की स्तुति में अथर्ववेद  की ऋचाएं (श्लोक) 

”  माता भूमि पुत्रोहं पृथिव्या” (Mata Bhumi putroham prithivyah)   

Meaning: –  पृथ्वी मेरी माता है और मैंं उसका पुत्र हुंं “Earth is my mother I am her son” 

   22 अप्रैल को हर साल Earth Day-पृथ्वी दिवस मनाया जाता है। Earth Day मनाने का उद्देश्य पृथ्वी को संरक्षित करने की आवश्यकता और महत्व को उजागर करना है। इस अवसर पर, आइए हम सबसे पुराने हिंदू ग्रंथों में से एक को देखें, अथर्व-वेद पर्यावरण और ग्रह पृथ्वी के बारे में कहना है। अथर्ववेद में वर्णित भूमि -सूक्त में पृथ्वी की माता के रूप में वंदना की गयी है। यह वैदिक ऋचाएं  हमे अपने ग्रह पृथ्वी तथा  पर्यावरण के प्रति दृष्टिकोण के बारे में शिक्षा  प्रदान करती  हैंं।

भूमि-सूक्त – मॉ पृथ्वी की स्तुति में अथर्ववेद  की ऋचाएं (श्लोक)

Earth Quotes in Hindi & Sanskrit/ भूमि-सूक्त

Quote 1 :  सत्यं बृहदृतमुग्रं दीक्षा तपो ब्रह्म यज्ञः पृथिवीं धारयन्ति ।
सा नो भूतस्य भव्यस्य पत्न्युरुं लोकं पृथिवी नः कृणोतु ॥१॥

In Hindi  मातृ पृथ्वी के लिए नमस्कार!  सत्य (सत्यम), ब्रह्मांडीय दैवीय नियमो (रितम), सर्वशक्तिमान   परब्रहम मे विद्यमान आध्यात्मिक शक्ति, ऋषियो मुनियों की समर्पण भाव से किये गये यज्ञ और तप,–इन सब ने मा धरती  को युगों –युगों से संरक्षित और संधारित किया है।  वह (पृथ्वी) जो हमारे लिए भूत और भविष्य की सह्चरी है, साक्षी  है,- हमारी आत्मा को  इस लोक से उस दिव्य  ब्रह्मांडीय जीवन (अपनी  पवित्रता और व्यापकता के माध्यम से) की और ले जाये।

In English: Salutation to the Mother Earth! The truth (Satyam), the cosmic Divine Rule (Ritam), the spiritual power present in the Supreme Lord Parabrahma, the dedication and penance performed by our Rishi Munis, all these have preserved  the Mother Earth from the ages.She (the Earth) is the witness of the past and the future, O mother take away our soul from this physical world through that divine cosmic life (through its purity and greatness).

Quote 2:    असंबाधं बध्यतो मानवानां यस्या उद्वतः प्रवतः समं बहु ।
नानावीर्या ओषधीर्या बिभर्ति पृथिवी नः प्रथतां राध्यतां नः ॥२॥                             

Pronunciation : Asambaadham Badhyato Maanavaanaam Yasyaa Udvatah Pravatah Samam Bahu |Naanaa-Viiryaa Ossadhiiryaa Bibharti Prthivii Nah Prathataam Raadhyataam Nah

In Hindi:– वह धरती मॉ जो अपने पर्वत, ढलान और मैदानों के माध्यम से मनुसष्यों तथा समस्त जीवों के लिए निर्बाध स्वतंत्रता (दोनों बाहरी और आंतरिक दोनों) प्रदान करती है। , वह कई पौधों और विभिन्न क्षमता के औषधीय जड़ी बूटी को जनम देती हैह  उन्हे परिपोषित करती है ; वह  हमें समृद्ध करे और हमें स्वस्थ बनाये.

In English  she  is the earth that provides uninterrupted freedom (both external and internal) to humans and all creatures through its mountains, slopes and plains. She gives birth to many plants and various medicinal herbs of various capacities; She enriches us and makes us healthy.

Quote 3:    यस्यां समुद्र उत सिन्धुरापो यस्यामन्नं कृष्टयः संबभूवुः ।
यस्यामिदं जिन्वति प्राणदेजत्सा नो भूमिः पूर्वपेये दधातु ॥३ ॥                                         

 Pronunciation :  yasyaam Samudra Uta Sindhur-Aapo Yasyaam-Annam Krssttayah Sambabhuuvuh |Yasyaam-Idam Jinvati Praannad-Ejat-Saa No Bhuumih Puurva-Peye Dadhaatu

In Hindi:  समुद्र और नदियो क जल जिसमें गूथा हुआ है, इसमें खेती करने से अन्न प्राप्त होता है, जिस पर सभी जीवन जीवित है, वह मॉ पृथ्वी हमें जीवन का अमृत प्रदान करे।

In English: In her is woven together Ocean and River Waters; in Her is contained Food which She manifests when ploughed, In Her indeed is alive all Lives; May She bestow us with that Life.

Quote 4:    यस्यां पूर्वे पूर्वजना विचक्रिरे यस्यां देवा असुरानभ्यवर्तयन् ।
                    गवामश्वानां वयसश्च विष्ठा भगं वर्चः पृथिवी नो दधातु ॥४

Pronunciation :Yasyaam Puurve Puurvajanaa Vicakrire Yasyaam Devaa Asuraan-Abhyavartayan |Gavaam-Ashvaanaam Vayasash-Ca Visstthaa Bhagam Varcah Prthivii No Dadhaatu

In Hindi:  इस पर आदिकाल से हमारे पूर्वज विचरण करते रहे, इस पर देवों (सात्विक शक्तियों) ने असुरों(तामसिक शक्तियों) को पराजित किया। इस पर गाय, घोडा, पक्षी,( अन्य जीव –जंतु)  पनपे। वह माता पृथ्वी हमें समृद्धि और वैभव प्रदान करे।

In English:  On this, our ancestors kept lived and performed (their activities) in earlier times, on this, the   (Satvik Powers) defeated the Asuras (Tamasik Powers). Cows, horses, birds, (other creatures) thrive on it That mother earth gives us prosperity and glory.

Quote 5:   गिरयस्ते पर्वता हिमवन्तोऽरण्यं ते पृथिवि स्योनमस्तु ।
बभ्रुं कृष्णां रोहिणीं विश्वरूपां ध्रुवां भूमिं पृथिवीमिन्द्रगुप्ताम् ।
अजीतेऽहतो अक्षतोऽध्यष्ठां पृथिवीमहम् ॥५॥

Pronunciation:  Girayas-Te Parvataa Himavanto-  arannyam Te Prthivi Syonam-Astu |
Babhrum Krssnnaam Rohinniim Vishvaruupaam Dhruvaam Bhuumim Prthiviim-Indra-Guptaam |Ajiite ahato Akssato- adhyasstthaam Prthiviim-Aham

In Hindi:  मातृ पृथ्वी के लिए नमस्कार  हे मातृ पृथ्वी, आपके पर्वत, और बर्फ से ढकी चोटिया, घने जंगल  हमे शीतलता  और सुखानुभुति  प्रदान करें ।   हे मॉ  आप अपने कई रंगों के साथ विश्वरूपा हो  – भूरा रंग (पहाड़ों की), नीला रंग( समुद्र के जल का) , लाल रंग (फूलों का); (लेकिन इन सभी विस्मयकारक रूपों के पीछे) हे मॉ धरती, आप ध्रुव की तरह हैं- दृढ और अचल; और आप इंद्र, द्वारा संरक्षित हैं।  (आपकी नींव जो कि अविजित है, अचल है, अटूट है, उस पर मै  दृढ्ता से खडा हु)‌

In English : (Salutations to Mother Earth) O Mother Earth,  Your Mountains, and snow-covered peaks, Dense forests, Give us coolness and Sukhanubhuti.  you are universal with many colors – brown color (of mountains), blue color (sea water), red color (flowers); (But behind all these enchanting forms) O mother earth, you are like Dhruv – strong and immovable; And you are protected by Indra, (Your foundation which is uninterrupted, is immovable, unbreakable, I stand firm on it)

Note : This translation  of भूमि-सूक्त – मॉ पृथ्वी की स्तुति में अथर्ववेद  की ऋचाएं (श्लोक) is as per my interpretation. Despite taking utmost care there could be some mistakes in Transliteration, Hindi &  English translation of Earth Quotes in Hindi & Sanskrit/भूमि-सूक्त – मॉ पृथ्वी की स्तुति में अथर्ववेद  की ऋचाएं (श्लोक)|

  Archana Tripathi 

8 thoughts on “भूमि-सूक्तम/ पृथ्वी पर अनमोल विचार

  1. दिनेश तिवारी

    भूमि सुक्त के पांच श्लोक के हिंदी अर्थ आ रहे हैं। आगे कैसे पढ़ा जाय।मुझे नेट जानकारी कम है । मेरी मदद करे।

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    1. Archana Tripathi Post author

      धन्यवाद
      अभी 5 ही श्लोक प्रकाशित किये है। आगे और लिखने की कोशिश करुँगी।

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      Reply
  2. डा चौहान

    गहन और स्पष्ट प्रस्तुति के लिये आभार

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